| Publisher |
Manjul Publishing House Pvt Ltd |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373172095 |
| ISBN-10 |
9373172093 |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
102 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
100 |
| Subject |
Poetry |
सायों से मैं सिवा रहा क़रीब धूप से शायद लिखा गया मेरा नसीब धूप से तेरा ख़याल यूँ है तस्व्वुर में दरख़्शाँ रौशन हूँ रात दिन मैं इक अजीब धूप से नर्मी की आँच भी है तपिश भी मिजाज़ में मिलता है किस तरह मेरा हबीब धूप से दिन भर की सोहबतें जला न दे इसीलिए रखते हैं दोस्ती सभी ग़रीब धूप से दरकार हरारत को बारिशों की है मगर मेरा इलाज कर रहे तबीब धूप से फिराई है नज़र जो मेरे आफ़ताब ने नहा रहा है आजकल रक़ीब धूप से
Rohit Singh
रोहित सिंह की शायरी रुमानियत, इश्क़, मा'नविय्यत और इंसानदोस्ती के फूलों से सजा वो गुलदस्ता है, जो पढ़ने वालों की आँखों में रंगीन चमक भी पैदा करता है और उनके ज़हनों में अपनी ख़ास ख़ुशबू भी फैलाता है। पर मुहब्बत और नर्म लहजे की इस शायरी में दर्द, तंज़ और तल्ख़ी के पहलू भी कभी-कभी ऐसे दस्तक देते हैं कि पढ़ने वालों को ज़िंदगी के मसाइल और सच्चाई की आहटें भी साफ़ सुनाई देती हैं। ज़्यादातर आसान लफ़्ज़ों की रौशनी से बना ये अलाव मीठी आँच भी देता है और नज़दीक जाने पर तमाज़त का अहसास भी कराता है।
Rohit Singh
Manjul Publishing House Pvt Ltd