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| Publisher | VANI PRAKSHAN |
| Publication Year | 2011 |
| ISBN-13 | 9788181432698 |
| ISBN-10 | 818143269X |
| Binding | Hardcover |
| Number of Pages | 80 Pages |
| Language | (Hindi) |
| Dimensions (Cms) | 20 x 14 x 4 |
| Weight (grms) | 196 |
| Subject | Agriculture & Farming |
रामदरश मिश्र ने अपने उपन्यासों में ग्राम जीवन के आंचलिक परिवेश, ग्रामीणों के रहन-सहन, बनते-बिगड़ते संबंध आदि का अत्यंत यथार्थ चित्रण किया है । सूखता हुआ तालाब भी उसी कि एक बानगी है जिसमे पनि कि समस्या को सिरे से उठाया गया है जो किसान के लिए तो गंभीर है ही साथ ही महानगरों के लिए भी आने समय में पनि कि कमी एक भयंकर समस्या बनकर सामने आएगी। लगभग 80 पन्नों का यह उपन्यास अपने आप में पूर्ण है। जो पाठकों को अपने भविष्य पर विचार करने के लिए एक मंच देता है।
Ramdarash Mishra
VANI PRAKSHAN