| Publisher |
SARVATRA |
| Publication Year |
2026 |
| ISBN-13 |
9789373171661 |
| ISBN-10 |
9373171666 |
| Binding |
Paperback |
| Number of Pages |
866 Pages |
| Language |
(Hindi) |
| Weight (grms) |
800 |
| Subject |
General Knowledge |
ईश्वर ही एकमात्र सत्य है। मनुष्य को जिस क्षण इसका ज्ञान हो जाता है उसी क्षण से उसकी मुक्ति का सफर शुरू हो जाता हैं। यह भौतिक जगत जैसा प्रतीत होता है वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। सत्य कभी मिटता नहीं है और असत्य कभी टिकता नहीं है। हर क्षण बदलते भौतिक जगत में तीव्र नश्वरता है। यहाँ अगर कुछ टिकाऊ है तो वह है रौशनी। माया के भौतिक जगत में रहने के कारण मनुष्य के लिए इसकी वास्तविकता को समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता है। मुक्ति का पहला सफ़र जितना आनंददायी होता है आखिरी सफर उतना ही कठिन होता है। प्रत्येक मनुष्य की यह यात्रा अलग होती है, हालाँकि अन्तिम मुकाम सभी का एक ही होता है। जीवन का मूल केवल और केवल सत्य होता है। यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि सत्य किसी मनुष्य को कितना अधिक शक्तिशाली बना सकता है। सत्य ही मुक्ति का आयाम खोलता है। अलग-अलग मनुष्यों के लिए सत्य का आयाम भिन्न हो सकता है। किन्तु इससे सत्य के मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं होता है। पृथ्वी पर मानव जीवन का खेल युग-युगान्तर से जारी है। हिमालय पर्वत, कैलाश पर्वत, मानसरोवर झील और गंगा नदी इस पृथ्वी लोक पर अकल्पनीय उपस्थितियाँ हैं। इनके गर्भ में असंख्य रहस्य छिपे हैं। हिमालय मात्र एक पर्वत नहीं है बल्कि दिव्य ऊर्जा क्षेत्र है, जहाँ समय की सीमाओं को पार कर अनगिनत लोग मुक्ति की समझ से परे आयामों में जा पहुँचे हैं। भौतिक ऊर्जा विज्ञान से उत्पन्न होकर दिव्य अध्यात्म की ओर पलायन कर जाती है। मुक्ति की तलाश में ही हर कोई यहाँ भटक रहा है।
Manjula Singh
इस पुस्तक की लेखिका मंजुला सिंह हैं। ये झारखण्ड के हजारीबाग जिले में रहती हैं। आप पेशे से एक वकील हैं और पीएच.डी. कर रही है। 'गंगा' इनकी प्रथम रचना है, इसमें इन्होंने मनुष्य जीवन से जुडे विज्ञान और अध्यात्म के रहस्यों को खोलने का प्रयास किया है।
Manjula Singh
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